भारतीय यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान के छठे स्थापना दिवस और तीसरे दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण
1. मेरे लिए इस प्रख्यात संस्थान के छठे स्थापना दिवस और तीसरे दीक्षांत समारोह पर भी आपके बीच होना सचमुच बड़ी प्रसन्नता की बात है। यह संस्थान जनवरी, 2010में स्थापित हुआ था और अपने समर्पित दल के साथ अल्पावधि में इसने देश के अग्रणी संस्थाओं में अपना स्थान बनाया है।

1. मैं आज शिव नाडर विश्वविद्यालय देश को समर्पित करने और एचसीएल नागरिक अनुदान सहायता पुरस्कार प्रदान करने के लिए आपके बीच आकर प्रसन्न हूं। आरंभ में मैं श्री शिव नाडर,एचसीएल के संस्थापक अध्यक्ष को उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में उनकी दूरदृष्टि के लिए बधाई देता हूं। दो दशक पहले आरंभ किया गया उनका फाउंडेशन आज परिवर्तनीय शिक्षा के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच बन गया है।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियो,
आज आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने करदाताओं को न्याय प्रदान करके राष्ट्र सेवा के75वर्ष पूरे किए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर,मैं आप सभी को बधाई तथा आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण परिवार को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं और यह कामना करता हूं कि आने वाले वर्षों में और अधिक सार्थक व उपयोगी राष्ट्रसेवा करते रहें। आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के स्थापित मॉडल को अप्रत्यक्ष कर, प्रशासन,रेल और विदेशी
मेरे प्यारे देशवासियो,
महामहिम, राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद,
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1. मैं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान जो हमारे देश में कृषि अनुसंधान,शिक्षा और विस्तार की एक अग्रणी संस्था है,के 54वें दीक्षांत समारोह पर आज आपके बीच उपस्थित होकर बहुत प्रसन्न हूं। मैं उन छात्रों को बधाई देता हूं जिन्हें आज डिग्री प्रदान की जा रही है। इस अवसर पर मैं इन छात्रों की समझ और कौशल को आकार देने के लिए संकाय के सदस्यों को भी बधाई देता हूं।
बंगाल की खाड़ी के समुद्र में खड़े शानदार युद्धपोतों के सुंदर दृश्य को देखना वास्तव में मेरा सौभाग्य है। ड्रेसिंग लाइनों पर फहराती पताकाएं और ध्वज अपने पोतों का संचालन कर रहे प्रसन्नचित और गर्वित श्वेत वर्दीधारी पुरुषों का देखना वास्तव में सुखद है। आज यहां आप सभी के बीच उपस्थित होना तथा पोतों की इस आकर्षक अंतरराष्ट्रीय परेड का अवलोकन करना मेरा सौभाग्य है। विशाखपत्तनम के पूर्व