भारत के राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधन
माननीय सदस्यगण,
1. नूतन और नवजीवन की प्रतीक इस बसंत ऋतु में , मैं संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में आप सभी का स्वागत करता हूं। यह एक ऐतिहासिक संयुक्त सत्र है,जिसमें स्वतंत्र भारत में पहली बार बजट सत्र के निर्धारित समय को इस वर्ष आगे लाया गया है एवं आम बजट के साथ रेल बजट का विलय किया जा रहा है। हम एक ऐसे लोकतंत्र के उत्सव के लिए पुन: एकत्र हुए हैं,जिसके मूल्य और संस्कृति इस देश के लंबे इतिहास के हर दौर में फलते-फूलते रहे हैं। वास्तव में इसी संस्कृति ने मेरी सरकार को सबका साथ , सबका विकास की ओर प्रेरित किया है।

1. कोच्चि मुजीरिस द्विवार्षिक के अद्यतन कार्यक्रम पर आज कोच्चि में आने पर मुझे प्रसन्नता हो रही है।
प्रख्यात अधिवक्ता और केरल लोकजन जांच आयोग के पूर्व सदस्य, श्री के.एस. राजामोनी के सम्मान में आयोजित छठा स्मृति व्याख्यान देने के लिए केरल आकर प्रसन्नता हुई है।
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शुभ संध्या, देवियो और सज्जनो,
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मुझे पिच@ राष्ट्रपति भवन के समापन सत्र में आपके साथ मिलकर और स्टार्ट अप प्रणाली के उद्यमियों,निवेशकों, उद्योग सदस्यों,स्टार्ट अप और अन्य सहायकों को संबोधित करते हुए प्रसन्नता हो रही है। मुझे युवा और नवान्वेषी प्रतिभाओं,जो अधिक अनुभवी नहीं होंगे परंतु जिनमें सफलता प्राप्त करने का उत्साह है,के इस समूह को देखकर हर्ष हो रहा है।
1. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आपके बीच आने में मैं सचमुच बहुत खुश हूं। हम रोजमर्रा के जीवन में भारत में महिलाओं को मान्यता देते हैं, याद करते हैं और उनकी सराहना करते हैं। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को - पूरे विश्व की महिलाओं को उनकी निःस्वार्थ सेवा के लिए विश्व के साथ आभार प्रकट करते हैं।
मैं यहां आपके बीच एक सप्ताह लंबे ‘नवोन्वेष उत्सव’ के समापन पर उपस्थित होकर खुश हूं। इस उत्सव में अलग-अलग स्टेक होल्डरों के बीच भावनात्मक आदान-प्रदान और सहयोग सम्पन्न हुए हैं। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से, सबसे प्रसन्नता की बात यह है कि हम राष्ट्रपति भवन में हमारी अर्थव्यवस्था और समाज में नवान्वेषण संस्कृति गहन करने की दिशा में एक पारितंत्र के संवाद और सृजन की सुविधा जुटा सके