कर्नाटक वाणिज्य और उद्योग चैंबर परिसंघ के शताब्दी समारोह के उद्घाटन के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण
1. कर्नाटक वाणिज्य और उद्योग चैंबर परिसंघ के शताब्दी समारोह का उद्घाटन करने के लिए इस सायं आपके बीच उपस्थित होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं आप सभी को अब तक की यात्रा तथा इस महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुंचने पर बधाई देता हूं। मैं समझता हूं कि 1916 में सर एम.विश्वेश्वरैया द्वारा इस परिसंघ की स्थापना मैसूर वाणिज्य चैंबर के तौर पर की थी। आज यह कर्नाटक के उद्योग,व्यापार तथा सेवा क्षेत्र का एक प्रमुख संगठन है।

24वां सरस्वती सम्मान प्रदान करने के अवसर पर आज यहां उपस्थित होना मेरे लिए बहुत प्रसन्नता की बात है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को मेरे साथी सांसद तथा कई दशक पुराने मित्र माननीय डॉ. एम. वीरप्पा मोइली को प्रदान करने का सौभाग्य मिलने पर मुझे विशेष प्रसन्नता हो रही है। मैं डॉ. मोईली से सफल राजनीतिक जीवन के साथ-साथ प्रचुर लेखन के द्वारा साहित्य के योगदान के लिए बधाई देता हूं।
उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रमुख, अन्य शैक्षिक और अनुसंधान संस्थानों के अध्यक्षगण,प्यारे विद्यार्थियो,
प्यारे देशवासियो :
महामहिमगण,
महामहिम, राष्ट्रपति जेम्स एलेक्स मिशेल,
आज की शाम मुझे उन विशिष्ट उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं से मिलने के लिए यहां उपस्थित होने पर वास्तव में प्रसन्नता हो रही है,जिन्होंने‘30 वीमेन इन पावर’पुस्तक में योगदान दिया है।
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मुझे आप के बीच उपस्थित होकर खुशी हो रही है। यह उचित है कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के द्वारा भारत के रूपांतरण में इसकी सेवाओं को सम्मानित करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को वर्ष2014 का गांधी शांति पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है।