पापुआ न्यू गिनिया के स्वतंत्र राज्य के गवर्नर जनरल माइकल ओगियो द्वारा राष्ट्रपति के सम्मान में दिए गए रात्रि भोज के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण
महामहिम सर माइकल ओगियो,
गवर्नर जनरल ऑफ पापुआ न्यू गिनिया,
महामहिम श्री पीटर ओ‘नील,पापुआ न्यू गिनिया के प्रधानमंत्री
महामहिम, विशिष्ट देवियो और सज्जनो,
पापुआ न्यू गिनिया के इस सुंदर देश में भारत के राष्ट्रपति द्वारा पहली राजकीय ऐतिहासिक यात्रा की करना मेरा सौभाग्य है। जब हम यहां पहुंचे हैं मैं पापुआ न्यू गिनिया की प्राकृतिक छवि के वैभव को देखकर में दंग रह गया।

संकाय के विशिष्ट सदस्यगण, प्रिय विद्यार्थियो और सज्जनो,
महामहिम लेफ्टिनेंट जनरल मान्यवर सर जेरी मेटपरे, महामहिमगण, विशिष्ट अतिथि, देवियो और सज्जनो, शुभ संध्या।
मैं इस संध्या पर भारतीय निर्यात संगठन परिसंघ (फियो) की स्वर्ण जयंती के अवसर पर यहां आकर बहुत प्रसन्न हूं।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह की इस संध्या में आपके बीच होने में मुझे हर्ष है।18 वर्ष पूर्व का 11मई का यह दिन भारत की प्रौद्योगिकीय क्षमताओं के विकास के संबंध में महत्वपूर्ण हैं। वर्ष1998 में इस दिन भारत ने पोखरण में सफलतापूर्वक परीक्षण द्वारा परमाणु प्रौद्योगिकी में एक बड़ी खोज की थी। यह दिन हमारे मिसाइल और उड़ान प्रौद्योगिकियों की उपलब्धियों से भी संबंधित है।
1.हमारे देश के योग्य नर्सिंग कर्मियों को वर्ष2016 का राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटेंगल पुरस्कार प्रदान करना वास्तव में मेरे लिए एक सुखद अवसर है। ये पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर प्रदान किए जाते हैं। सर्वप्रथम,मैं इस मौके पर संपूर्ण नर्सिंग समुदाय को अपनी हार्दिक बधाई देता हूं।
1.मुझे स्मार्ट राष्ट्रपति संपदा के लिए इंटेलिजेंट ऑपरेशन्स सेंटर के उद्घाटन करने और मोबाइल एप‘मॉनिटर’को लॉन्च करने पर बड़ी प्रसन्नता हुई है। सर्वप्रथम मैं राष्ट्रपति भवन की टीम और आईबीएम की टीम को अवधारणा,सहयोग और इस महत्वपूर्ण परियोजना के तीव्र कार्यान्वयन के लिए बधाई देना चाहूंगा जिसका उद्देश्य संपदा को एक स्मार्ट टाउनशिप में परिवर्तित करना है।
1.मैं आपको आपके स्वागत योग्य शब्दों के लिए धन्यवाद देता हूं। मैं ग्वांग्झू में चीन की राजकीय यात्रा आरंभ करके बहुत प्रसन्न हूं। यह ऐतिहासिक शहर भारतीय व्यवसाय के लिए सदैव एक महत्वपूर्ण विश्राम स्थल रहा है। भारत और चीन के बीच विद्यमान आज के संपन्न व्यापार और आर्थिक संबंध,जो आज बने हुए हैं की स्थापना यहीं से हुई। दूसरी शताब्दी बी सी ई की हं शू (हन वंश की पुस्तक) में दक्षिणी भा
1.मैं चीन के विशिष्ट सांस्कृतिक और अग्रणी शैक्षिक व्यक्तियों के एकत्रित समूह को संबोधित करने में अपने आप को सम्मानित महसूस कर रहा हूं।