भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 78वें बैच के विदाई समारोह में संबोधन(HINDI)

नागपुर : 15.04.2026

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आज इस महत्वपूर्ण अवसर पर आप सबके बीच उपस्थित होना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का विषय है। मैं सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को—जिनमें Royal Bhutan Service के दो अधिकारी प्रशिक्षु भी शामिल हैं—सफलतापूर्वक Induction training पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई देती हूँ। National Academy of Direct Taxes एक अत्यंत प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थान है, जिसने दशकों से भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के अधिकारियों को उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रदान कर देश की प्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सुदृढ़ और सक्षम बनाया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यहाँ आपने न केवल कानूनों और प्रक्रियाओं का गहन ज्ञान अर्जित किया है, बल्कि एक लोकसेवक के रूप में अपनी भूमिका, दायित्वों और मूल्यों को भी आत्मसात किया है।

आज हमारा देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर है। ऐसे समय में प्रशासनिक व्यवस्था तथा उससे जुड़े प्रत्येक संस्थान का दायित्व और अधिक बढ़ जाता है कि वे उच्चतम स्तर की दक्षता और पारदर्शिता को अपनाएं तथा समावेशी दृष्टिकोण के साथ कार्य करें।

प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियो,

भारतीय इतिहास के महान विचारक कौटिल्य ने ‘अर्थशास्त्र’ में शासन का एक कालजयी सिद्धांत प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा था कि जिस प्रकार मधुमक्खी फूलों को क्षति पहुँचाए बिना उनसे मधु संचित करती है, उसी प्रकार शासक को प्रजा पर अनावश्यक भार डाले बिना कर संग्रह करना चाहिए। यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है। यह हमें सिखाता है कि कराधान केवल राजस्व संग्रह का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राज्य और नागरिकों के बीच विश्वास का सेतु भी है। कर प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो प्रभावी होने के साथ-साथ न्यायपूर्ण, संवेदनशील और संतुलित भी हो। हाल के वर्षों में भारत की आर्थिक यात्रा अत्यंत गतिशील और प्रेरणादायक रही है। प्रत्यक्ष कर संग्रह में सतत वृद्धि होना, कर अनुपालन में सुधार तथा कर आधार के विस्तार का संकेत है। यह नागरिकों और प्रशासन के बीच बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है। आयकर अधिनियम, 2025, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ है, इस परिवर्तनकारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह सुधार एक आधुनिक, सरल और पारदर्शी कर व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। आप इस नए कानून के क्रियान्वयन के अग्रदूत होंगे। इसकी वास्तविक सफलता केवल इसके सही, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन से ही सुनिश्चित होगी—और यह महत्वपूर्ण दायित्व आपके कंधों पर है।

भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों के रूप में आपकी भूमिका केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है। आप जन विश्वास के संरक्षक हैं, आप न्याय और निष्पक्षता के प्रहरी हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत की कर प्रशासन प्रणाली में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। Technology driven systems के माध्यम से पारदर्शिता को बढ़ाया गया है, जिससे नागरिकों के लिए व्यवस्था अधिक सरल, सहज और सुविधाजनक बनी है। Citizen accessibility को सुदृढ़ करने वाले ये प्रयास प्रशासनिक प्रणाली में सकारात्मक बदलाव को दर्शाते हैं। यह सराहनीय है कि भारत विभिन्न bilateral और multilateral agreements में भागीदारी करके international taxation system को भी अधिक सरल और सुलभ बनाने के लिए अग्रसर है। इससे भारत सरकार की Ease of Doing Business पहल के तहत multinational enterprises के लिए व्यवसाय करना भी अधिक सुगम हो गया है।

सभी युवा अधिकारियों को यह सदैव स्मरण रखना चाहिए कि विनम्रता, संयम और संवेदनशीलता आपकी कार्यशैली के अभिन्न अंग होने चाहिए। आपकी जिम्मेदारी केवल नियमों को लागू करना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को सुदृढ़ करना भी है। न्याय, पारदर्शिता और ईमानदारी के आधार पर लिए गए निर्णय न केवल शासन को सुदृढ़ बनाते हैं, बल्कि देश और उसके नागरिकों के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। आप देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और सुशासन के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

एक न्यायपूर्ण कर प्रणाली वही होती है जो अनुचित कार्यों को दृढ़ता से रोके और ईमानदार करदाताओं के सम्मान को सुनिश्चित करे।

आने वाले समय में आप उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय लेन-देन की जटिलताओं और tax evasion के नए तरीकों जैसी चुनौतियों का सामना करेंगे। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए आपको उन्नत प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करना होगा। Data analytics और Artificial intelligence आपकी क्षमताओं को सशक्त बनाएंगे, परंतु यह सदैव स्मरण रखें कि प्रौद्योगिकी केवल एक साधन है—आपका विवेक, ईमानदारी और नैतिक दृष्टिकोण ही आपकी वास्तविक पहचान होंगे। भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कराधान के क्षेत्र में अनुसंधान की ओर भी विशेष ध्यान देना होगा। तेजी से बदलती वैश्विक और राष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों में Evidence based policy making की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। गहन अनुसंधान न केवल नीति निर्माण को अधिक प्रभावी बनाएगा, बल्कि प्रशासनिक निर्णयों को भी अधिक सुदृढ़ और भविष्य उन्मुख बनाएगा। इसलिए आप सबको इस बात पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए और कराधान के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियो,

हर Income tax return जो देश का नागरिक भरता है, उसके पीछे परिश्रम, आकांक्षा और उद्यम की कोई कहानी होती है। आपका दायित्व केवल कानून का पालन सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक, विशेषकर समाज के वंचित वर्ग से आने वाले नागरिक को सम्मान और निष्पक्षता का अनुभव हो। Voluntary compliance को बढ़ाने के लिए भी नागरिकों का कर प्रणाली में विश्वास होना आवश्यक है। जब आप अपने public service career की शुरुआत कर रहे हैं, तो यह स्मरण रखें कि ‘अमृत काल’ अवसरों और उत्तरदायित्वों का काल है। आपका प्रत्येक आकलन, निर्णय और कार्य राष्ट्र के भविष्य को आकार देगा। आप ईमानदारी को अपनी पहचान बनाइए, निष्पक्षता को अपना मार्ग बनाइए और देश सेवा को अपना सर्वोच्च उद्देश्य बनाइए। याद रखिए, एक सच्चा अधिकारी वही होता है जो अपने पद से नहीं, बल्कि अपने कार्य और नेतृत्व- क्षमता से पहचाना जाता है। यदि आप इन मूल्यों को अपनाएँगे, तो आप केवल सफल अधिकारी ही नहीं बनेंगे, बल्कि संवेदनशील, उत्तरदायी और प्रेरणादायी लोकसेवक के रूप में स्थापित होंगे। आपकी यात्रा में चुनौतियाँ अवश्य आएँगी, लेकिन वही चुनौतियाँ आपको और अधिक सशक्त, परिपक्व और दूरदर्शी बनाएँगी।

मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देती हूँ। मेरी मंगलकामना है कि आप साहस, स्पष्टता, करुणा और दृढ़ संकल्प के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें तथा एक सार्थक और प्रेरणादायी जीवन जिएँ।

जय हिन्द!
जय भारत!

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