भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का ‘पर्पल फेस्ट’ के अवसर पर सम्बोधन(HINDI)
राष्ट्रपति भवन : 13.03.2026
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दिव्यांगजनों की क्षमताओं और उपलब्धियों के उत्सव, ‘पर्पल फेस्ट’, में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। आप सब ने अमृत उद्यान के प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद उठाने के साथ-साथ आज यहां आयोजित अनेक गतिविधियों में भाग लिया। मुझे विश्वास है कि इससे न केवल आपका मनोरंजन हुआ होगा बल्कि आपको बहुत कुछ सीखने को भी मिला होगा।
राष्ट्रपति भवन परिसर के अमृत उद्यान में प्रति वर्ष प्रकृति के सौन्दर्य को देखने के लिए अनेक लोग आते हैं। लोगों के लिए यह एक अविस्मरणीय सुखदायी अनुभव होता है। राष्ट्रपति भवन के द्वार सबके लिए खुले हैं। लेकिन दिव्यांगजन हमारे विशेष मेहमान हैं। हर वर्ष एक विशेष दिन उनके लिए निर्धारित होता है।
देवियो और सज्जनो,
कोई भी देश या समाज सिर्फ इस बात से नहीं जाना जाता कि वह सक्षम वर्ग के लोगों के लिए कितना कर पाया है, बल्कि इस बात से जाना जाता है कि वो वंचित वर्गों के प्रति कितना संवेदनशील है। अगर हम भारतीय इतिहास को देखें तो हम पाएंगे कि संवेदनशीलता, समावेशिता और सद्भाव में विश्वास हमारी संस्कृति और सभ्यता के मानक रहे हैं।
आज के विश्व में हमारे देश का गौरव बढ़ाने में डॉक्टर दीपा मलिक, सुश्री अरुणिमा सिन्हा, सुश्री अवनि लेखरा जैसी कई बेटियों ने अभूतपूर्व योगदान दिया है। ये सब लोग इस बात का प्रमाण है कि समर्पण और दृढ़ संकल्प के बल पर किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।
भारत का संविधान हमें आदर्श सामाजिक मानक प्रदान करता है। हमारे संविधान की प्रस्तावना सामाजिक न्याय, प्रतिष्ठा की समता, और व्यक्ति की गरिमा के आदर्श स्थापित करती है। राज्य के नीति-निदेशक तत्व दिव्यांगजन के लिए शिक्षा, कार्य और सार्वजनिक सहायता पाने का अधिकार प्रदान करते हैं।
दिव्यांगजनों ने शिक्षा, खेल-जगत, विज्ञान, कला, साहित्य, उद्यमिता और सार्वजनिक जीवन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इस पर्पल फेस्ट की विभिन्न प्रदर्शनियों में भी उनकी प्रतिभा की झलक देखने को मिली। दिव्यांगजनों ने हमेशा यह सिद्ध किया है कि उचित अवसर और सहयोग मिलने पर वे अपने कौशल और प्रतिभा से समाज और राष्ट्र को गौरवान्वित कर सकते हैं।
दिव्यांगजन पूरी क्षमता के साथ राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने में सक्षम हों, इसके लिए भारत सरकार अनेक कदम उठा रही है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और सुलभता से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सुगम्य भारत अभियान के माध्यम से सार्वजनिक भवनों, परिवहन सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म को अधिक सुलभ बनाया जा रहा है। सहायक यंत्रों या उपकरणों की खरीद और फिटिंग के लिए दिव्यांगजनों को सहायता योजना (ADIP scheme) और प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराये जा रहे सहायक उपकरण लाखों लोगों को स्वतंत्रता और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने में सहायता कर रहे हैं। आज तकनीक और नवाचार दिव्यांगजन के सशक्तीकरण के नए अवसर खोल रहे हैं।
देवियो और सज्जनो,
दिव्यांगजनों का सशक्तीकरण समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण है। लेकिन यह केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति और संस्था की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। यह प्रसन्नता का विषय है कि सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और कॉरपोरेट जगत इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।
हम वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सामूहिक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस यात्रा में हमारे दिव्यांगजन भी बराबर के भागीदार हैं। उन्हें समान अवसर और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना समाज के प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है।
मैं दिव्यांग बेटे-बेटियों से कहना चाहूंगी कि आप पूरे आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ें, आपको सरकार और समाज का सहयोग मिलेगा। आपकी लगन, मेहनत और परिश्रम न केवल आपको प्रगति के मार्ग दिखाएगा बल्कि सभी देशवासियों को प्रेरणा भी प्रदान करेगा। मेरी हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी के साथ हैं।
धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत!
