भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय के उद्घाटन एवं इसके प्रथम शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ के अवसर पर सम्बोधन (HINDI)

कटक : 03.08.2026

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इस विश्वविद्यालय के उद्घाटन एवं प्रथम शिक्षण सत्र के शुभारंभ के अवसर पर आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। आज इस विश्वविद्यालय का उद्घाटन कृपालु महाराज जी की जन-कल्याण की सोच को कार्यरूप देने का प्रयास है। मैं इस सत्कार्य में योगदान देने वाले सभी लोगों की सराहना करती हूं।

ओडिशा ज्ञान, संस्कृति, आध्यात्मिकता और सेवा की समृद्ध परंपरा की धरती रही है। महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की इस पावन भूमि ने सदियों से समावेश, करुणा और मानव-कल्याण का संदेश दिया है। कटक का यह क्षेत्र भी उत्कल गौरव मधुसूदन दास, कर्मवीर गौरीशंकर राय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और जननेता बीजू पटनायक जैसे महान विभूतियों की जन्म भूमि है। यह उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास और उत्कल केसरी डॉ. हरेकृष्ण महताब की कर्मभूमि भी है। जनसेवा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्रों में कटक का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी रहा है। ऐसे गौरवशाली क्षेत्र में स्थापित इस विश्वविद्यालय से अपेक्षा की जाती है कि यह संस्थान भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ते हुए समाज और राष्ट्र की सेवा का एक सशक्त माध्यम बने।

शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र के समृद्ध भविष्य की आधारशिला है। कटक में जन्मी स्वतंत्रता सेनानी, रमादेवीजी की स्मृति में स्थापित रमादेवी विश्वविद्यालय से मैंने उच्च शिक्षा ग्रहण की। वे महिला उत्थान के लिए लगातार सक्रिय रहीं। उनकी प्रेरणा ने मेरे जीवन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस विश्वविद्यालय के नीति-निर्माताओं से मेरा आग्रह है कि वे शुरुआत से ही वंचित वर्गों, जनजातीय विद्यार्थियों और बालिकाओं की शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाएं।

देवियो और सज्जनो,

आज भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है। यह हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। इस पूंजी का समुचित उपयोग करने के लिए हमारे विश्वविद्यालयों को ऐसे वातावरण का निर्माण करना है जहां युवा अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास कर सके और अपने सपनों और आकांक्षाओं को साकार कर सके। उनको मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करनी है। विश्वविद्यालयों के ऊपर ऐसे नागरिक तैयार करने की जिम्मेदारी है जो सत्यनिष्ठा, अनुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित की भावना से ओतप्रोत हों। युवाओं का ज्ञान तभी सार्थक है जब वह मानवता की सेवा, समाज के कल्याण और राष्ट्र की उन्नति का माध्यम बने। मुझे विश्वास है कि भारत की युवा शक्ति अपने विवेक, ज्ञान, प्रतिभा और ऊर्जा का सदुपयोग करते हुए विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगी।

देवियो और सज्जनो,

आज यह विश्वविद्यालय अपनी यात्रा की शुरुआत कर रहा है। मुझे आशा है कि इस विश्वविद्यालय के नीति-निर्माताओं ने भविष्य की योजनाओं का roadmap बनाया होगा। मेरा मानना है कि कुछ मूल लक्ष्यों को ध्यान में रख कर आगे कदम बढ़ाने से विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के साथ-साथ समाज, देश और उससे भी बढ़कर सम्पूर्ण मानवता का कल्याण होगा। ये मूल लक्ष्य होने चाहिए: नैतिक आदर्शों और संवैधानिक मूल्यों को पाठ्यक्रम एवं परिसर की संस्कृति का हिस्सा बनाना; कौशल विकास और Industry- Academia सहयोग को बढ़ावा देना; महिला सशक्तीकरण और कमजोर वर्गों के लिए समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करना; अनुसंधान, नवाचार और स्टार्ट- अप संस्कृति को मजबूत करना; रोजगार सृजित करने वाले उद्यमियों और नैतिक नेतृत्व का विकास करना; और सबसे बढ़कर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले नागरिकों का निर्माण करना।

हमने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य रखा है। ऐसे ही 2036 तक ओडिशा को विकसित ओडिशा बनाने का लक्ष्य रखा है। इन लक्ष्यों की प्राप्ति में हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका है। उन्हें ऐसे ज्ञान-केंद्रों के रूप में कार्य करना है जहां पर विकसित हुए विचार और प्रौद्योगिकी, समाज की आवश्यकताओं का समाधान करें। वे आधुनिक ज्ञान को अपनाने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों के प्रति भी आस्थावान हों। मुझे बताया गया है कि इस विश्वविद्यालय में research और innovation तथा entrepreneurship को बढ़ावा दिया जाएगा। विद्यार्थियों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास पर भी बल दिया जाएगा। मुझे आशा है कि यह विश्वविद्यालय भविष्य में skilled manpower, researchers और entrepreneurs को तैयार करेगा जो ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में अपना योगदान देंगे।

मेरी शुभकामना है कि जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय आने वाले समय में ज्ञान, अनुसंधान, और नवाचार का केंद्र बने। इस संस्थान से शिक्षित विद्यार्थी देश और समाज के कल्याण में अपना योगदान दें। मेरी शुभकामनाएं आप सब के साथ हैं।

धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत!
बंदे उत्कल जननी!

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