भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का Bharati-Naari to Narayani: the First National Convention of Women Thought Leaders समारोह में संबोधन

नई दिल्ली : 08.03.2026

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इस आयोजन के लिए ‘भारतीय विद्वत् परिषद’ तथा ‘राष्ट्र सेविका समिति’ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मैं सराहना करती हूं।

मुझे बताया गया है कि ‘भारतीय विद्वत् परिषद’ द्वारा भारतीय ज्ञान- परंपरा, शास्त्रीय चिंतन और वैचारिक विमर्श को जीवंत बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में दर्शन, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, गणित, साहित्य तथा कला की महान विरासत को ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ जैसे प्रयासों से संरक्षित और प्रसारित किया जा रहा है। भारतीय भाषाओं तथा भारतीय ज्ञान परम्परा को प्राथमिकता देकर आत्म-निर्भर और विकसित भारत के निर्माण को सांस्कृतिक आधार प्रदान किया जा रहा है। ऐसे प्रयासों से जुड़े सभी संस्थानों को पारस्परिक समन्वय के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

मुझे आप सबके साथ यह साझा करते हुए हर्ष का अनुभव हो रहा है कि इस वर्ष वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन के पावन अवसर पर राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ नामक एक विशेष पुस्तकालय का शुभारंभ किया गया। ‘ग्रंथ कुटीर’ में भारत की शास्त्रीय भाषाओं में संरक्षित ज्ञान परंपरा से समृद्ध पाण्डुलिपियों तथा ग्रन्थों का संग्रह उपलब्ध है। राष्ट्रपति भवन के द्वार सभी आगंतुकों के लिए खुले हैं। आप जब भी राष्ट्रपति भवन का भ्रमण करेंगे, तब आप ‘ग्रंथ कुटीर’ के संग्रह का भी अवलोकन कर सकेंगे। मुझे विश्वास है कि उस संग्रह को देखकर आपको प्रसन्नता होगी।

देवियो और सज्जनो,

अंतर-राष्ट्रीय महिला दिवस के इस महत्वपूर्ण अवसर पर मैं आप सबको बधाई देती हूं। साथ ही, आप सबसे यह अनुरोध भी करती हूं कि नारी-शक्ति के प्रेरक उदाहरणों का स्मरण करें तथा आज के संदर्भ में उनके आदर्शों को कार्यरूप प्रदान करें। वैदिक काल में ब्रह्मवादिनी महिलाओं की प्रखरता से लेकर आधुनिक युग में रानी दुर्गावती, वीरमाता जीजाबाई, रानी चेन्नम्मा, लक्ष्मीबाई, झलकारी-बाई और देवी अहिल्या-बाई होल्कर के शौर्य तथा बुद्धिमत्ता के आदर्श पूरे समाज के लिए, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

पूरे देश में हमारे राष्ट्रीय-गीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष सम्पन्न होने का उत्सव मनाया जा रहा है। यह उत्सव मातृशक्ति का वंदन है। हमारे महान राष्ट्रीय-गीत के शब्दों में भारत माता एक ओर सुहासिनी और सुमधुर भाषिणी हैं तो दूसरी ओर रिपुदल वारिणी और दश प्रहरण धारिणी देवी दुर्गा भी हैं। राष्ट्र सेविका समिति की प्रार्थना में भारत माता का विश्व शक्ति के रूप में नमन किया जाता है। उस प्रार्थना में यह भी बताया गया है कि हमारे देश की नारी सुधीरा है, समर्था है तथा श्रद्धा के साथ अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ती है।

सेवा, समर्पण, राष्ट्रीयता, वीरता, धैर्य और प्रतिभा के आयामों पर नारी- शक्ति पुरुषों के समकक्ष है अथवा श्रेष्ठतर है। उच्च शिक्षण संस्थानों के अधिकांश समारोहों में मैंने देखा है कि श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक होती है। यह इस बात का प्रमाण है कि अवसर मिलने पर बेटियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। लेकिन, हमें इस कटु यथार्थ को भी स्वीकार करना होगा कि आज भी अनेक महिलाओं को सामाजिक रूढ़ियों, आर्थिक असमानताओं और psychological barriers का सामना करना पड़ता है। महिलाओं से जुड़ी ऐसी समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता पर आधारित सामूहिक प्रयास से ही किया जा सकता है।

राष्ट्र सेविका समिति जैसे संगठन इस दिशा में निर्णायक योगदान दे सकते हैं। यह बहुत खुशी की बात है कि लगभग नौ दशक पहले जिस संस्थान का शुभारंभ हुआ था वह आज महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के अनेक आयामों पर सक्रिय है। आज से लगभग एक दशक पहले राष्ट्र सेविका समिति के अंतर्गत ‘शरण्या’ नामक समूह की स्थापना की गई। मुझे बताया गया है कि ‘शरण्या’ का उद्देश्य वंचित वर्गों की महिलाओं में शिक्षा, कौशल, आत्म- निर्भरता तथा नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। मुझे विश्वास है कि यह प्रयास, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में अच्छा प्रयास सिद्ध होगा। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

मैं विभिन्न राज्यों में अपनी यात्राओं के दौरान वंचित वर्गों की बहनों और बेटियों से मिलने को प्राथमिकता देती हूं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी बहनों, स्व-रोजगार स्थापित करने वाली महिलाओं तथा सरकार द्वारा कल्याण कार्यक्रमों के तहत दी जाने वाली धनराशियों का बहुत समझदारी के साथ उपयोग करने वाली गृहिणियों से मैं मिली हूं। विपरीत परिस्थियों के बीच उन महिलाओं की उपलब्धियां मुझे आशान्वित करती हैं कि हमारे देश की महिलाएं किसी भी चुनौती का सामना करके आगे बढ़ सकती हैं।

देवियो और सज्जनो,

महिलाएं, खेत-खलिहानों से लेकर अन्तरिक्ष तक, स्व-रोजगार से लेकर सेनाओं तक, अपना योगदान दे रही हैं। खेल-कूद के क्षेत्र में हमारी बेटियों ने विश्व-स्तर पर नए प्रतिमान स्थापित किए हैं।

यह बहुत प्रसन्नता की बात है कि महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों के बल पर अनेक क्षेत्रों में हमारी बहनों-बेटियों की भागीदारी बढ़ी है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है। ‘प्रधानमंत्री - जन धन योजना’ के तहत अब तक 57 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें महिलाओं के खाते लगभग 56 प्रतिशत हैं।

पंचायती राज संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है। महिलाओं के राजनैतिक सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से, महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी। आज हमारा देश women led development की सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।

देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 10 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। देश में लखपति दीदियों की संख्या 2 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। कुल 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निकट भविष्य में ही प्राप्त कर लिया जाएगा।

सितंबर 2025 में चलाए गए 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' अभियान के तहत लगभग सात करोड़ महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की जा चुकी है। इस अभियान द्वारा महिलाओं का इलाज शीघ्रता से शुरू कराया जा सका है। इस प्रकार, नारी केन्द्रित योजनाएं हमारी बेटियों और बहनों को संबल प्रदान कर रही हैं।

देवियो और सज्जनो,

हमारी परंपरा के अनुसार शक्ति ही शिव को पूर्णता प्रदान करती हैं। शिव और शक्ति की अभिन्नता हमारी सांस्कृतिक चेतना का मूल तत्व है। मानव समाज की प्रगति का रथ तभी आगे बढ़ेगा जब उस रथ के दोनों पहिये, अर्थात महिलाएं और पुरुष, पूर्णत: समान और समन्वित रहेंगे।

मुझे विश्वास है कि हमारे देश की महिलाएं पुरुषों के समकक्ष योगदान देते हुए तेजस्वी राष्ट्र के रूप में विकसित भारत का निर्माण करने में समान भूमिका निभाएंगी।

धन्यवाद!
जय हिन्द!
जय भारत!

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