भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित ‘एकता और विश्वास के द्वारा महाराष्ट्र का स्वर्णिम भविष्य’ कार्यक्रम में सम्बोधन (HINDI)
नागपुर : 25.02.2026
(104.47 KB)आज विश्व शांति सरोवर में ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित “एकता और विश्वास के माध्यम से स्वर्णिम महाराष्ट्र” अभियान के शुभारंभ के अवसर पर आप सबके बीच आकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। मैं इस आयोजन के लिए ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान को हार्दिक बधाई देती हूँ।
महाराष्ट्र देश में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास के उदाहरण प्रस्तुत करता रहा है। यह पवित्र भूमि राष्ट्र-निर्माण की उन महान विचारधाराओं और आदर्शों की जन्मभूमि रही है, जिन्होंने भारतवासियों में नवचेतना का संचार किया। छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर महात्मा ज्योतिबा फुले, वासुदेव बलवंत फड़के, महर्षि धोंडो कर्वे, राजर्षि शाहू महाराज, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले, विनायक दामोदर सावरकर और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे युगपुरुषों के चिंतन, संघर्ष और योगदान ने हमारे राष्ट्र को सशक्त बनाया है। उनके जीवन मूल्यों से मिली प्रेरणा आज भी हमें सही दिशा दिखाती है।
छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे देश की सबसे प्रेरक विभूतियों में से एक हैं। उन्होंने न्याय और आजादी के पक्ष में संघर्ष किया। उनका वह संघर्ष स्वराज के लिए था। शिवाजी महाराज ने भारत में लोक-कल्याणकारी, न्याय-प्रधान और सुरक्षा-केन्द्रित शासन का बीज बोया। महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा, समानता और महिला सशक्तीकरण का जो अभियान शुरू किया, वह केवल महाराष्ट्र का नहीं, पूरे भारत के सामाजिक पुनर्जागरण का आधार बना। ऐसी महान विभूतियों से हमें देशप्रेम, एकता और विश्वास का संदेश मिलता है जो देश के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।
देवियो और सज्जनो,
महाराष्ट्र पूरे देश की प्रगति को शक्ति देता रहा है। उद्योग, कृषि, उद्यमिता, नवाचार, उच्च शिक्षा और अमूल्य सांस्कृतिक परंपराएँ, इन सबके बल पर महाराष्ट्र, आत्मविश्वास से आगे बढ़ते हुए भारत की विकास यात्रा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हमारा लक्ष्य ऐसे समग्र विकास की ओर बढ़ना है, जिसका लाभ हर नागरिक तक पहुँचे। इतिहास से प्रेरणा लेकर तथा आधुनिक तकनीक, कौशल-विकास और नवाचार की शक्ति का उपयोग करके एक अधिक सशक्त और समृद्ध महाराष्ट्र तथा भारत के निर्माण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य करना होगा। इस दिशा में, ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है इस कार्यक्रम से महाराष्ट्र के निवासियों को आतंरिक शक्ति, सकारात्मक नेतृत्व और मूल्य- आधारित विकास की प्रेरणा मिलेगी।
अध्यात्म के माध्यम से लोग मानवीय मूल्यों के प्रति जागरुक और कर्तव्यनिष्ठ बनते हैं। हानिकारक प्रवृत्तियों से मुक्ति, आपसी सौहार्द, नैतिक आचरण, आत्म-संयम, सकारात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व – ये सभी मिलकर समाज को सशक्त बनाते हैं। जब ऐसे मूल्य जीवन का हिस्सा बनते हैं, तब स्वाभाविक रूप से समाज में विश्वास स्थापित होता है। आपसी विश्वास से समाज में सकारात्मक और सार्थक कार्यों को बढ़ावा मिलता है। मैं महाराष्ट्र की जनता को उनके परिश्रम, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम के लिए नमन करती हूँ। मुझे आशा है कि आज का यह कार्यक्रम स्वर्णिम, सशक्त और समृद्ध महाराष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरणा देगा।
एकता और विश्वास वे आधारशिलाएँ हैं जिन पर एक शक्तिशाली राष्ट्र खड़ा होता है। जब समाज में आपसी भरोसा बढ़ता है, तो लोग व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर साझा लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मिलजुल कर काम करते हैं। आध्यात्मिक स्तर पर लोग करुणा, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान का भाव अपनाएँ तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है। प्रत्येक नागरिक समानता को बढ़ावा देकर, भेदभाव को छोडकर और सामुदायिक सेवाओं में भाग लेकर राष्ट्र-निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकता है। जब लोग एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं, तब विकास केवल सरकारी योजनाओं के बल पर ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता के द्वारा तेज़ी से आगे बढ़ता है। यही भागीदारी हमें विकसित भारत के मार्ग पर आगे ले जाएगी।
सरकार, राष्ट्रीय एकीकरण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए अनेक पहल कर रही है। “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की सोच के साथ विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया गया है।
डिजिटल इंडिया अभियान से पारदर्शिता बढ़ी है और सेवाओं की पहुंच आसान हुई है। DBT के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाकर उनका भरोसा सुदृढ़ किया गया है। आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में निवेश से समावेशी विकास को गति मिल रही है। ऐसे सभी प्रयासों से नागरिकों का विश्वास बढ़ता है और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया अधिक सशक्त बनती है।
भारत तभी सही अर्थों में विकसित कहलाएगा जब सबको आगे बढ़ने के समान अवसर मिलेंगे, technology विकास का साधन बनेगी और प्रगति का लाभ घर-घर तक पहुँचेगा। मैं ब्रह्माकुमारीज़ को इस प्रेरणादायक अभियान के लिए पुनः बधाई देती हूँ। मुझे विश्वास है कि यह पहल समाज में एकता और विश्वास को सुदृढ़ करेगी। मैं इस अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएं देती हूँ और आप सबके उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना करती हूँ।
धन्यवाद,
जय हिंद।
जय भारत।
