भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का AIIMS नागपुर के द्वितीय दीक्षांत समारोह में संबोधन(HINDI)
नागपुर : 15.04.2026
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नागपुर की इस पवित्र भूमि पर आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। कल ही हम देशवासियों ने भारत के संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जन्म जयंती मनाई है। आज उनकी दीक्षा भूमि नागपुर की इस धरती से मैं उनकी पुण्य स्मृति को नमन करती हूं।
राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, AIIMS नागपुर में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को मैं बहुत-बहुत बधाई देती हूं। आज उपाधि और पदक प्राप्त करने वाली बेटियों को मैं विशेष बधाई देती हूं। यहाँ पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक है। देशभर में AIIMS, IITs, IIITs, IIM, engineering institutions, law institutes जहां भी मैं जाती हूँ, यह परिवर्तन दिखाई देता है। देशवासियों का सपना है देश की आजादी के 100 वर्ष पूरा होने तक विकसित भारत का। मेरा मानना है कि बेटा और बेटियाँ मिलकर इस सपना को पूरा करेंगे। मैं इस सफलता में योगदान देने वाले विद्यार्थियों के माता- पिता, अभिभावकगण और शिक्षकों की भी सराहना करती हूं।
प्रिय विद्यार्थीगण,
आपने जिस परिश्रम, प्रतिबद्धता और लगन के साथ अपनी शिक्षा पूर्ण की है, वह सराहनीय है। आप सब एक नई यात्रा का शुभारंभ कर रहे हैं। आज उपाधि ग्रहण करने के साथ आप लोग एक महत्वपूर्ण दायित्व को स्वीकार कर रहे हैं जो मानव जीवन और समाज की भलाई से जुड़ा हुआ है। चिकित्सा का क्षेत्र केवल एक profession नहीं है। यह संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा करने का मार्ग है। एक चिकित्सक न केवल बीमारियों का उपचार करता है, बल्कि बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों के मन में आशा का संचार भी करता है। आपके द्वारा दिया गया सहानुभूतिपूर्ण परामर्श न केवल बीमार व्यक्ति बल्कि उसके परिवारजनों को भी संबल प्रदान करता है। कई बार चिकित्सकों के सामने कठिन परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। लेकिन उन परिस्थितियों में भी बीमार व्यक्ति और उनके परिवारजनों के प्रति संवेदनशीलता का भाव बनाए रखना चाहिए। मरीजों और उनके परिवारजनों को भी चिकित्साकर्मियों के प्रति सदैव सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। चिकित्सक और मरीज के बीच के विश्वास को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है।
प्रिय विद्यार्थीगण,
यह हर्ष का विषय है कि अपनी स्थापना के कुछ ही वर्षों में, AIIMS नागपुर ने चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षा प्राप्त करना अपने आप में गौरव की बात है। मुझे विश्वास है कि इस संस्थान में आपने न केवल ज्ञान और कौशल अर्जित किया होगा, बल्कि मानवीय मूल्यों, नैतिकता और सेवा-भाव को भी आत्मसात किया होगा। आपके संस्थान का motto है 'स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्' अर्थात अच्छे स्वास्थ्य से हर कार्य पूरा किया जा सकता है। कहा जाता है स्वास्थ्य ही सम्पदा है। अगर स्वास्थ्य ठीक हो तो काम करने के लिए, आगे बढ़ने के लिए हिम्मत बढ़ेगी। इस मूल मंत्र को आप पूरी तरह से आत्मसात करें और मरीजों के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य पर भी पूरा ध्यान दें।
आप AIIMS नागपुर से उपाधि प्राप्त करने वाले आरंभिक बैच के विद्यार्थी हैं। आने वाले समय में, आप देश-विदेश में अनेक क्षेत्रों में कार्य करेंगे। आप जहां भी कार्य करें, अपने ज्ञान, कार्य और व्यवहार से ऐसा मानदंड स्थापित करें कि AIIMS नागपुर के भावी विद्यार्थी आप पर गर्व करें और संस्थान का नाम ऊंचा हो।
देवियो और सज्जनो,
देशवासियों का अच्छा स्वास्थ्य देश की प्रगति के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उनके व्यक्तिगत कल्याण के लिए। देशवासी स्वस्थ रहें और पूरी क्षमता से राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान दे सकें इसके लिए पिछले एक दशक के दौरान भारत सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 43.5 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए देशभर में लगभग 185000 आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए हैं, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों के घर के पास ही स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के माध्यम से Lab, Critical Care Unit, और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है।
इसके साथ ही Digital Health Mission, टीकाकरण कार्यक्रमों का विस्तार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सुदृढ़ीकरण के द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा है। गंभीर बीमारियों के नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग कार्यक्रम और राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। लोगों को सस्ती और अच्छी गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से AMRIT फार्मेसी और जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए देशभर में नए AIIMS की स्थापना की गई है। इससे न केवल बेहतर इलाज की सुविधा बढ़ी है, बल्कि मेडिकल शिक्षा के अवसर भी बढ़े हैं। इन सभी प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाएं अधिक समावेशी, सुलभ और सस्ती हो रही हैं। लेकिन ऐसे प्रयासों को निरंतर गति देने की आवश्यकता है।
आज का युग स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में तीव्र परिवर्तन का युग है। दुनियाभर में नई-नई तकनीकों, Artificial Intelligence, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और उन्नत अनुसंधान के माध्यम से चिकित्सा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहा है। हमें इन परिवर्तनों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। Technological developments का उपयोग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की असमानता को दूर करने और सभी तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने में करना चाहिए। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि AIIMS नागपुर इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
देवियो और सज्जनो,
चिकित्सकों को समाज में ऊंचा स्थान दिया जाता है। हमारे यहाँ चिकित्सकों की भगवान के साथ तुलना की जाती है। लोग आपका सम्मान करते हैं, आप पर भरोसा करते हैं। वे अपने और अपने प्रियजनों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा आपको सौंपते हैं। इसलिए मरीजों के हितों को सर्वोपरि रखना आप सबका सामाजिक और नैतिक दायित्व है। इस दायित्व का उचित निर्वाह करके आप अपनी और medical profession की प्रतिष्ठा को और अधिक बढ़ा सकते हैं। आपके सामने ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहां चिकित्सकों ने सेवा के माध्यम से लोगों के जीवन और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया है और medical profession के लिए प्रतिष्ठा अर्जित की है।
मेरा मानना है कि चिकित्सकों में सेवा भावना के साथ-साथ जीवन-पर्यंत सीखते रहने की भावना भी होनी चाहिए। जिज्ञासा प्रगति का आधार है। चिकित्सा विज्ञान में नए-नए समाधान खोजने की प्रेरणा न केवल आपको एक उत्कृष्ट चिकित्सक बनाएगी बल्कि सेवा करने का बेहतर अवसर भी प्रदान करेगी। युवा चिकित्सकों को मेरा सुझाव है कि आप नवाचार, अनुसंधान और निरंतर सीखने की भावना को आत्मसात करें। साथ ही, यह सदैव स्मरण रखें कि चिकित्सा क्षेत्र में नैतिक मूल्यों का स्थान सर्वोपरि है। Technology चाहे जितनी भी advance क्यों न हो जाए, यह करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान नहीं ले सकती। करुणा की भावना को सदैव बनाए रखें क्योंकि यह आपको केवल एक अच्छा चिकित्सक ही नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान भी बनाती है।
चिकित्सा-जगत से जुड़े लोग सौभाग्यशाली हैं जिन्हें मानवता की सेवा करने का विशेष अवसर मिला है। उन्हें इस जिम्मेदारी पर गर्व होना चाहिए और इस जिम्मेदारी को संवेदनशील तरीके से निभाना चाहिए। मुझे विश्वास है कि आज उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि देशवासियों को स्वस्थ रखने में अपना योगदान देंगे। आपके ऐसे प्रयासों के बल पर ही हम स्वतन्त्रता के शताब्दी वर्ष तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने में सफल होंगे।
मैं आप सभी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देती हूं। आप निरंतर प्रगति करें, समाज की सेवा करें और अपने संस्थान और देश का नाम ऊंचा करें, इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्त करती हूं।
धन्यवाद,
जय हिंद!
जय भारत!
