भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 12वें ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के अवसर पर संबोधन(HINDI)

जबलपुर : 21.06.2026

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जबलपुर को विशेष पहचान देने वाली, मां नर्मदा की पावन धरती पर, आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्‍नता हो रही है। मैं देश-विदेश में सक्रिय सभी योग साधकों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। आज हम यहां भारत की उस महान परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन का मार्ग दिखाया है। योग विश्व-समुदाय को हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य उपहार है। यह हमारे ऋषियों और मनीषियों की हजारों वर्षों की साधना का परिणाम है। हमारे शास्त्रों में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को जीवन की सफलता का आधार माना गया है। योग उसी संतुलन को स्थापित करने का मार्ग है।

योग शब्द का शाब्दिक अर्थ है—‘जोड़ना’। योग व्यक्ति को स्वयं से, समाज को प्रकृति से तथा सम्पूर्ण मानवता को व्यापक विश्व-चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। आज विश्व जब अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग मानवता को शांति, संतुलन, समरसता और सामूहिक कल्याण का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

देवियो और सज्जनो,

वर्ष 2014 में, भारत की पहल पर, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इस पहल से, पिछले 12 वर्षों में, विश्व-कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में योग पद्धति की पहचान और भी मजबूत हुई है। आज विश्व के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। इसी महीने अहमदाबाद में आयोजित प्रथम World Yogasana Sports Championship इसका एक अच्छा उदाहरण है। उस आयोजन में कई देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

मुझे बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस - 2026 का theme है ‘Yoga for Healthy Ageing’. यह theme समाज के वरिष्ठ सदस्यों के स्वस्थ, सक्रिय, आत्मनिर्भर एवं गरिमापूर्ण जीवन के लिए योग की उपयोगिता को रेखांकित करती है। आज हम जो जीवनशैली अपनाते हैं, वही हमारे आने वाले समय के स्वास्थ्य और सुख का आधार बनती है। योग बढ़ती आयु में भी व्यक्ति के सक्रिय और आत्मनिर्भर बने रहने में सहायक होता है। साथ ही, मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है।

देवियो और सज्जनो,

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हमारे सामने एक बड़ी चुनौती हैं। आज इन बीमारियों की रोक-थाम में समग्र चिकित्सा-पद्धति का प्रयोग व्यापक रूप से हो रहा है। योग इस समग्र प्रणाली का अहम हिस्सा है जो सरल, प्रभावी और सुलभ है। भारत सरकार योग को जन-जन तक पहुँचाने के लिए, योग शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा जन-जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। यह प्रसन्नता का विषय है कि अनेक संस्थाएं विश्व-स्तर पर लोगों को योग पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मेरा मानना है कि योग से जुड़ी संस्थाओं के निष्ठापूर्ण प्रयासों के बल पर योग जन-जन तक पहुंचेगा और समस्त मानवता के कल्याण का आधार-स्तम्भ बनेगा।

मैं, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, सभी देशवासियों से यह संकल्प लेने का आग्रह करती हूं कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएंगे। ऐसा करके वे स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज, स्वस्थ राष्ट्र और स्वस्थ विश्व के निर्माण के महान लक्ष्य में अपना योगदान देंगे।

धन्यवाद,
जय हिंद!
जय भारत!

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