भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 79वें बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं द्वारा मुलाकात किए जाने के अवसर पर संबोधन

राष्ट्रपति भवन : 10.03.2026

डाउनलोड : भाषण भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 79वें बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं द्वारा मुलाकात किए जाने के  अवसर पर संबोधन(हिन्दी, 84.12 किलोबाइट)

प्रिय भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के प्रशिक्षु अधिकारियो,

इस प्रतिष्ठित सेवा में चयनित होने पर मैं आप सबको हार्दिक बधाई देती हूं। मैं रॉयल भूटान सेवा के दो अधिकारियों को भी बधाई देती हूं। आप सब ने सिविल सेवा परीक्षा में अपने दृढ़ संकल्प, लगन और योग्यता के बल पर सफलता प्राप्त की है। अब आप एक ऐसी अग्रणी सेवा में आ चुके हैं जिसका मूलभूत कार्य देश के विकास, लोक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों को जुटाकर राष्ट्र निर्माण करना है।

आयकर विभाग का ध्येय वाक्य 'कोष मूलो दण्ड' कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लिया गया है। यह आपको सदा स्मरण कराता रहेगा कि शासन की शक्ति राजकोष पर टिकी है। प्रत्यक्ष कर राष्ट्र के विकास की गति की बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्यक्ष-कर राजस्व का एक स्थिर स्रोत हैं और इससे अवसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश करने में सरकारों को सहायता मिलती है। एक निष्पक्ष और पारदर्शी कर प्रणाली समानता बढ़ाती है और समावेशी और सतत विकास को मूल रूप से मजबूती प्रदान करती है। आईआरएस अधिकारी के रूप में, आप सबकी यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी कि करों का संग्रह निष्पक्षता, दक्षता और पारदर्शिता के साथ किया गया है।

राजस्व सेवा का दायित्व केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है। जटिल वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण करने, सीमा पार से होने वाले अवैध वित्तीय प्रवाह का पता लगाने और दुरूह कॉर्पोरेट संरचनाओं को समझने की आपकी क्षमता आपको विकसित भारत के लक्ष्य की ओर राष्ट्र की विकास-यात्रा को गति प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण भागीदार बनाती है। आप सब से अपेक्षा की जाती है कि न्यायसंगत, सटीक और बिजनेस प्रणालियों की गहरी समझ पर आधारित निर्णय लिए जाएं। मुझे विश्वास है कि आप सब कारोबारी सुगमता (ईज ऑफ डूईंग बिजनेस) और देश के राजस्व की रक्षा करने के बीच सही संतुलन बना कर रखेंगे।

प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियो,

आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। औद्योगीकीकरण, फोरमलाइजेशन, डिजिटलीकरण और शहरीकरण से हमारी अर्थव्यवस्था में बदलाव आ रहा है और इससे कर प्रशासन के सामने बड़े-बड़े मौकों के साथ-साथ नई- नई चुनौतियां भी उत्पन्न हो रही हैं।

सीमा पार लेन-देन की बढ़ती मात्रा और कराधान में गहरे अंतरराष्ट्रीय सहयोग होने के नाते आईआरएस अधिकारियों का आज वैश्विक संस्थानों और संधि साझेदारों के साथ जुड़ाव बढ़ता जा रहा है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था को सशक्त करने में भी आप महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आपकी पेशेवर दक्षता और सत्यनिष्ठा से अंतरराष्ट्रीय कर प्रशासन में भारत की विश्वसनीयता बरकरार रहेगी। मुझे विश्वास है कि राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी में प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम से आपने आय कर अधिनियम और इससे जुड़े कानूनों की जानकारी तो अर्जित की ही होगी, साथ ही आपने उच्च कोटि की विश्लेषण क्षमता, तकनीकी ज्ञान, नीतिपरक अंतर्दृष्टि और नेतृत्व गुण हासिल कर लिए होंगे। हाल के वर्षों में भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रहणों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। सकल प्रत्यक्ष कर संग्रहणों में हो रही सतत वृद्धि यह दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था और संगठित हुई है, प्रणालियां बेहतर हुई हैं और इनसे करदाता तथा सरकार के बीच विश्वास बढ़ा है।

प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियो,

मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि आयकर विभाग ने अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करना लगातार जारी रखा। इसने सरलीकृत आयकर ढांचा और डेटा-आधारित अनुपालन प्रणाली जैसी पहल की है। पहले से भरे हुए रिटर्न्स, और वार्षिक सूचना विवरण की सुविधा बढ़ाई है और पहचान-विहीन कर प्रशासन और बेहतर हुआ है। इन सभी पहल से पारदर्शिता, दक्षता बढ़ी है और करदाताओं को और सुविधा मिली है।

कर प्रशासन में प्रगतिशील बदलाव लाने के लिए, विभाग की "नॉन-इंट्रूसिव यूसेज ऑफ डेटा टू गाइड एंड इनेबल" (नज) पहल एक महत्वपूर्ण कदम है। मुझे बताया गया है कि इस पहल से रिपोर्टिंग (कर जमा करने) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और तत्काल बाध्यकारी कार्रवाई के बजाय डेटा-आधारित जानकारियों का प्रयोग करके स्व-प्रेरित अनुपालन करवाने में सुधार हुआ है। इस दृष्टिकोण से भरोसा बढ़ता है, अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होती है और उत्तरदायी अनुपालन की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा माइनिंग और जोखिम-आधारित सत्यापन प्रणालियों के बढ़ते प्रयोग से पता चलता है कि हम प्रौद्योगिकी-संचालित प्रशासन की ओर बढ़ रहे हैं। मैं आप सभी से आग्रह करती हूं कि कर प्रशासन को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और नागरिक- केंद्रित बनाने के लिए उन्नत तकनीकों से लाभ उठाएं।

आपका यह बैच, अपने प्रशिक्षण के दौरान नए आयकर अधिनियम, 2025 का अध्ययन करने और इसे जमीनी स्तर पर लागू करने वाला पहला बैच होगा। आपको कर वंचना और आर्थिक अपराधों के खिलाफ विश्वसनीय निवारण-तंत्र स्थापित करने और स्वैच्छिक अनुपालन सुनिश्चित करने की दोहरी भूमिका निभानी है। कर प्रशासक के रूप में, आप देश के कर ढांचे के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करके कानून के शासन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। लोक सेवा के प्रति लगनशील और प्रतिबद्ध होकर आप सबको नागरिकों के भरोसे को और बढ़ाना है और उन संसाधनों की सुरक्षा करनी है जिन पर देश का विकास टिका है।

आईआरएस अधिकारी के रूप में, आपको अपने व्यवहार में और निर्णय लेने की प्रक्रिया में विवेक से काम लेना है। एक विवेकशील अधिकारी वही है जो नियमों के प्रवर्तन और सुविधा, अधिकार और विनम्रता तथा तकनीकी क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखता है। इस प्रकार का विवेकशील आचरण, नियमों का अनुपालन और व्यवस्था में नागरिकों के विश्वास को बढ़ाता है। आपको दिए गए प्राधिकार का प्रयोग हमेशा विनम्रता, संयम और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ करें। मुझे विश्वास है कि आप अपने कर्तव्यों का समर्पण, सत्यनिष्ठा और साहस के साथ निर्वहन करेंगे। आप उत्कृष्ट बनें और विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा में सार्थक योगदान दें।

धन्यवाद!
जय हिंद!
जय भारत!

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