भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में संबोधन

जबलपुर : 21.06.2026

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आज रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के अवसर पर आप सबके बीच आकर मुझे प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। रानी दुर्गावती जिनके नाम पर यह विश्वविद्यालय स्थापित है वे अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं। पिछले वर्ष ही गोंडवाना साम्राज्य की उस महान शासक और वीरांगना की 501वीं जन्म-जयंती देशवासियों ने मनाई थी। संयोग से आज से दो दिन बाद 24 जून को उनका 462वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती भारत की नारी शक्ति के शौर्य की प्रतीक हैं। वे सदैव नारी शक्ति के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगी। मैं महान रानी दुर्गावती की स्मृति में सादर नमन करती हूं।

देवियो और सज्जनो,

प्रकृति के मनोरम क्षेत्र में स्थित और पुण्य सलिला मां नर्मदा के जल से संपोषित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की यात्रा पर आप सबको गर्व होगा। इस विश्वविद्यालय के आस-पास के क्षेत्र में जनजातीय-वनवासी संस्कृति की प्रचुर उपस्थिति है। इस विश्वविद्यालय से जुड़े रानी दुर्गावती के नाम की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब सभी भागीदार जनजातीय समाज और वंचित तथा पिछड़े वर्गों, विशेषकर इन वर्गों की बेटियों के सशक्तीकरण के लिए प्रयास करें। बड़ा बनना अच्छी बात है लेकिन हम जिस समाज से आते हैं उसकी चिंता करना हमारा कर्तव्य है। शिक्षित युवाओं को अपने समाज के लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए। उन्हें सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताना चाहिए। हमने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रत्येक गाँव, प्रत्येक प्रदेश का विकास जरूरी है। साथ ही, उस गाँव और प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति का विकास जरूरी है। ऐसे ही सर्वांगीण विकास से 2047 तक विकसित भारत का हमारा सपना पूरा होगा।

शिक्षा ही किसी भी व्यक्ति या समुदाय के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए जनजातीय समुदाय के शैक्षिक विकास के लिए प्रयास करना बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे बताया गया है कि इस विश्वविद्यालय में ग्रामीण एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु अनेक विशेष कौशल आधारित पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

हम सबको मिलकर यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास में भागीदारी करने का अवसर मिले और साथ ही, उनकी जनजातीय पहचान व अस्मिता अपने सहज रूप में बनी रहे। जनजातीय समुदाय के लोगों के कौशल एवं ज्ञान को आधुनिक माध्यमों से प्रसारित करने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में, इस विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों को विशेष प्रयास करना चाहिए। जनजातीय ज्ञान एवं शिल्प परंपरा का व्यापक स्तर अध्ययन सभी देशवासियों के लिए लाभदायक होगा।

उच्च शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ नवाचार और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र भी होते हैं। विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमिता का विकास करना शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही, संस्थानों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाओं के प्रति गर्व के भाव को संचारित करें। आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से देश का संतुलित विकास संभव होगा। इस विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे एवं पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित करने की पहल सराहनीय है। मुझे ज्ञात हुआ है कि यह विश्वविद्यालय वैदिक गणित एवं भारतीय शैक्षणिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार हेतु विभिन्न संस्थाओं के साथ सहयोग के लिए प्रयासरत है। यहां पर नवाचार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुझे बताया गया है कि यहां पर कार्यरत Design Innovation Centre द्वारा पेटेंट भी प्राप्त किये गए हैं।

प्यारे विद्यार्थियो,

विद्यार्थियों के लिए दीक्षांत समारोह जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि आज दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक पाने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या बहुत अधिक है। यह हमारी बेटियों के निरंतर आगे बढ़ने के संकल्प और देश के सर्वांगीण विकास का प्रतीक है।

आज हमारा देश नवयुवकों का देश है, जिनमें कुछ भी करने का अदम्य साहस है। देश और देशवासियों को आपसे बड़ी अपेक्षाएं हैं और ये अपेक्षाएं तभी पूर्ण होंगी जब आपको योग्यतानुसार रोजगार मिलें। इसके लिए केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें प्रयासरत हैं। RUSA तथा Centre of Excellence जैसी योजनाओं से विश्वविद्यालयों को प्राप्त हो रहे अनुदान से अधोसंरचना के विकास, अनुसंधान के क्षेत्र में नवाचार तथा शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है। अध्ययन एवं अनुसंधान उच्च शिक्षा के अभिन्न अंग हैं। हमें ऐसे अध्ययन एवं अनुसंधान पर बल देना होगा जो देश और समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हों।

देवियो और सज्जनो,

पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, वंचित वर्गों का विकास, स्वच्छता, सामाजिक समरसता आदि विषयों को अध्ययन एवं अनुसंधान में शामिल करने से समाज लाभान्वित होता है। साथ ही, देश के विकास के लिए योजनाएं बनाने में सहायता मिलती है। हम सबकी ऐसी सोच और ऐसे प्रयास होने चाहिए कि मध्य प्रदेश सहित देश के सभी विश्वविद्यालय ज्ञान-विज्ञान एवं अनुसंधान के उत्कृष्ट संस्थान के रूप में राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हों।

प्यारे विद्यार्थियो,

आज पूरा विश्व तेजी से बदल रहा है। हमारी भाषा, रहन-सहन, जीवनशैली सब तेज गति से बदल रहे हैं। पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे कुछ मूल्य शाश्वत हैं जो हमें सदैव शक्ति प्रदान करते हैं। मेरा मानना है कि आप जैसे युवाओं को भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा, और ईमानदारी जैसे मूल्य हर युग की मूल चेतना का हिस्सा रहे हैं। इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाकर आप कठिन परिस्थितियों का भी दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, एक आदर्श नागरिक बन सकते हैं, राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

आप केवल अपने परिवार या विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। आपके ज्ञान, ऊर्जा और संकल्प से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। मैं आपसे आग्रह करती हूँ कि अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक कल्याण के लिए करें। अपने आसपास के वंचित और ग्रामीण समुदायों की समस्याओं को समझें। उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करें, उन्हें सशक्त बनाएं और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएं। अपना कर्तव्य निभाते हुए आपको समाज की सेवा भी करनी है।

आज देश डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्टार्ट-अप्स, हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक अवसंरचना के क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। इन अवसरों का लाभ उठाइए, नवाचार कीजिए, शोध कीजिए और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाइए। परंतु इस प्रगति के साथ पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी निभाइए। जल, जंगल और जमीन का संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, जैव-विविधता की रक्षा तथा सतत विकास के लिए प्रतिबद्धता आपकी जीवन-यात्रा का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।

मुझे विश्वास है कि आप सब युवा अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझकर जीवन में आगे बढ़ेंगे और अपने संस्थान, क्षेत्र और देश का नाम रोशन करेंगे।
मैं आप सबके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूं।

धन्यवाद!
जय हिन्द!
जय भारत!
 

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